पहाड़ों के पास बसे एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन बहुत फुर्तीला था, लेकिन उसकी एक आदत थी—वह बिना सोचे-समझे तुरंत काम करने की कोशिश करता था। उसका दोस्त रोहन बहुत ही समझदार और शांत स्वभाव का था।
एक दिन, गाँव के उत्सव के लिए उन्होंने पेड़ से शहद इकट्ठा करने का फैसला किया। अर्जुन ने उत्साह में आकर कहा, 'मैं सबसे पहले चढ़ूँगा और सारा शहद ले आऊँगा!' और वह एक विशाल पेड़ की ओर दौड़ पड़ा।
रोहन ने उसे रोका, 'रुको अर्जुन! उस पेड़ की छाल बहुत चिकनी है, वह चढ़ने के लिए सही जगह नहीं है। बगल वाला आम का पेड़ ज्यादा सुरक्षित है।'
लेकिन अर्जुन ने उसकी बात नहीं मानी। वह तेजी से पेड़ पर चढ़ने लगा। आधा ऊपर पहुँचते ही उसका पैर फिसल गया और वह चिल्लाते हुए नीचे गिर पड़ा। सौभाग्य से वह झाड़ियों में गिरा इसलिए उसे ज्यादा चोट नहीं आई, लेकिन शहद इकट्ठा करने का उसका सपना टूट गया।
वहीं दूसरी ओर, रोहन ने शांति से सुरक्षित पेड़ पर चढ़कर शहद इकट्ठा किया और खुशी-खुशी वापस आया। अर्जुन को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने सही जगह का चुनाव नहीं किया था, इसलिए वह अपनी जीत खो बैठा।