एक सुंदर गाँव में कदीर नाम का एक लड़का अपने माता-पिता के साथ रहता था। कदीर बहुत होनहार था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी—जो भी पैसे मिलते, वह उन्हें तुरंत खर्च कर देता था। एक दिन उसके पिता ने उसे एक छोटी सी गुल्लक दी और कहा, "कदीर, रोज़ थोड़ा-थोड़ा पैसा बचाओ। पता नहीं कब कौन सी मुसीबत आ जाए।"
लेकिन कदीर ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया। उसे तो बस नए खिलौने और मिठाइयाँ चाहिए थीं। वह रोज़ मिलने वाले पैसों से बाज़ार जाकर चीज़ें खरीद लेता था। वहीं उसकी छोटी बहन, नीला, अपने पिता की बात मानती थी और रोज़ अपने सिक्कों को एक छोटे से डिब्बे में जमा करती थी।
कुछ महीनों बाद, गाँव में बहुत तेज़ बारिश हुई। बारिश की वजह से कदीर के पिता काम पर नहीं जा पा रहे थे। घर के ज़रूरी सामान के लिए अचानक पैसों की ज़रूरत पड़ी। कदीर दौड़कर अपनी गुल्लक के पास गया, लेकिन उसमें एक भी पैसा नहीं था। उसने सारा पैसा खिलौनों में उड़ा दिया था। नीला ने अपनी बचत का उपयोग करके ज़रूरी चीज़ें खरीदने में मदद की। कदीर को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह बहुत पछताया। उसे समझ आया कि अगर उसने समय रहते बचत की होती, तो आज वह भी मदद कर पाता।