एक छोटे से गाँव में करी नाम का एक लड़का रहता था। उसे लकड़ी का काम करना बहुत पसंद था। एक बार, गाँव के एक पुराने और नक्काशीदार लकड़ी के संदूक को ठीक करने की जिम्मेदारी करी के पास आई। वह संदूक बहुत ही जटिल था। गाँव के बड़े-बुजुर्गों ने कहा, 'करी, यह तुम्हारे बस का नहीं है, यह बहुत कठिन काम है।'
शुरुआत में करी थोड़ा घबराया, लेकिन उसने हार नहीं मानी। हर दिन स्कूल के बाद, वह एक छोटे से दीये की रोशनी में, पूरी एकाग्रता के साथ उस संदूक के एक-एक हिस्से पर काम करता। कई बार ऐसा हुआ कि लकड़ी के टुकड़े सही से नहीं जुड़े या काम बिगड़ गया। लेकिन करी ने अपना धैर्य और ध्यान नहीं खोया। उसने अपनी गलतियों से सीखा और और भी सावधानी से काम करना शुरू किया।
कुछ हफ्तों के बाद, वह संदूक पहले से कहीं अधिक सुंदर और मजबूत बन गया। करी की मेहनत देखकर गाँव वाले दंग रह गए। करी ने सबको दिखा दिया कि कोई भी काम असंभव नहीं है, यदि उसे पूरी सावधानी और अटूट प्रयास के साथ किया जाए।