एक सुंदर पहाड़ी गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसके पिता गाँव के मुखिया थे। एक सुबह, गाँव का पवित्र स्वर्ण दीपक गायब हो गया। पूरे गाँव में खलबली मच गई। अर्जुन के पिता ने सच्चाई जानने के लिए जाँच करने का निर्णय लिया। जाँच के दौरान, गाँव के एक बहुत अमीर व्यक्ति के बेटे रवि पर संदेह हुआ।
कुछ लोगों ने फुसफुसाते हुए कहा, "मुखिया जी तो उनके अच्छे मित्र हैं, वे उसे सजा नहीं देंगे।" अर्जुन ने ध्यान से देखा कि उसके पिता ने किसी की तरफदारी नहीं की। उन्होंने रवि को बुलाया, शांति से उसकी बात सुनी और बिना किसी भेदभाव के सबूतों की जाँच की। पता चला कि रवि ने जिज्ञासावश दीपक लिया था और अनजाने में उसे कहीं रख दिया था। पिता ने उसे कठोर दंड देने के बजाय, अपनी गलती सुधारने और गाँव की सेवा करने का अवसर दिया। निष्पक्षता और गहराई से जाँच करने के कारण, पूरे गाँव ने उनका सम्मान किया।