बहुत समय पहले, चंद्रपुर नामक एक समृद्ध राज्य में विक्रम नाम का एक राजकुमार रहता था। वह तलवार के बल पर नहीं, बल्कि अपने दयालु स्वभाव से लोगों का दिल जीतना चाहता था। उसके दादा, राजा प्रताप ने उसे सिखाया था, 'बेटा, एक सच्चा राजा वह है जो डर से नहीं, बल्कि प्रेम से शासन करता है।'
एक बार राज्य में भीषण सूखा पड़ा। नदियाँ सूख गईं और किसान दाने-दाने को तरसने लगे। विक्रम ने महल के आराम को छोड़कर बाहर निकलने का फैसला किया। उसने अपने राजकोष से अनाज निकलवाकर गरीबों में बाँट दिया। वह खुद खेतों में गया और किसानों के साथ मिलकर कुएँ खोदने में उनकी मदद की। उसने लोगों की समस्याओं को सुना और उन्हें हल करने का प्रयास किया।
विक्रम ने कभी अपनी शक्ति का उपयोग लोगों को डराने के लिए नहीं किया, बल्कि उनकी सेवा के लिए किया। जब सूखा खत्म हुआ, तो लोग विक्रम को केवल अपना राजा नहीं, बल्कि अपना रक्षक मानने लगे। लोग उसके प्रति सम्मान और प्रेम से भरे हुए थे, क्योंकि उसने उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ा था।