एक सुंदर घाटी में विक्रम नाम का एक गाँव का मुखिया रहता था। विक्रम अपनी ईमानदारी और न्यायप्रियता के लिए जाना जाता था। एक शाम, जब वह गाँव में घूम रहा था, उसने देखा कि कुछ डाकू किसानों को डरा-धमका रहे हैं और उनकी फसलें चुरा रहे हैं। गाँव वाले बहुत डरे हुए थे।
विक्रम ने तुरंत अपने गाँव के पहरेदारों को इकट्ठा किया और डाकुओं को भगा दिया। लेकिन विक्रम जानता था कि केवल डाकुओं को भगाना काफी नहीं है। उसे यह सुनिश्चित करना था कि गाँव वाले फिर से सुरक्षित महसूस करें और कोई भी दोबारा अपराध न करे। उसने डाकुओं को कानून के अनुसार दंडित किया ताकि समाज में डर बना रहे कि गलत काम करने का परिणाम बुरा होता है।
साथ ही, विक्रम ने गाँव की सुरक्षा व्यवस्था को और भी मजबूत किया। उसने यह भी देखा कि कुछ लोग गरीबी के कारण चोरी कर रहे थे, इसलिए उसने गाँव में ही काम के अवसर पैदा किए ताकि वे सही रास्ते पर आ सकें। विक्रम ने साबित कर दिया कि एक सच्चा नेता वही है जो अपने लोगों को बाहरी खतरों से बचाता है और गलत करने वालों को सजा देकर न्याय सुनिश्चित करता है। अब गाँव में चारों ओर शांति थी।