चंद्रपुर के राजा विक्रम बहुत बुद्धिमान थे। उनके पास अर्जुन नाम का एक बहुत ही चतुर गुप्तचर था। एक दिन, राजदरबार में सभी मंत्रियों के सामने राजा विक्रम ने अर्जुन की बहुत प्रशंसा की। उन्होंने कहा, 'अर्जुन हमारे राज्य का सबसे भरोसेमंद साथी है, उसकी जानकारी ही हमारी शक्ति है!'
अर्जुन को बहुत अच्छा लगा, लेकिन राजा की इस प्रशंसा ने एक समस्या खड़ी कर दी। जब लोगों ने देखा कि राजा अर्जुन को कितना महत्व दे रहे हैं, तो सबको समझ आ गया कि अर्जुन के पास बहुत कीमती जानकारी है। एक बुद्धिमान सलाहकार ने राजा को समझाया, 'महाराज, किसी गुप्तचर को सबके सामने सम्मानित न करें। ऐसा करने से आप अनजाने में यह बता देते हैं कि आपके सबसे बड़े रहस्य किसके पास हैं। इससे दुश्मन उस व्यक्ति को निशाना बना सकते हैं।' राजा को अपनी गलती समझ आ गई और उन्होंने तय किया कि अब से गुप्तचरों के साथ केवल एकांत में ही बात की जाएगी।