पहाड़ों के पास बसे एक छोटे से गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। उसे चित्रकारी का बहुत शौक था। गाँव के वार्षिक उत्सव के लिए, उसने एक बहुत बड़ी और सुंदर पेंटिंग बनाने का फैसला किया। उसने कई दिनों तक कड़ी मेहनत की और रंगों से एक अद्भुत चित्र तैयार किया।
उत्सव के दिन, जब आर्यन अपनी पेंटिंग लेकर जा रहा था, तभी उसका पैर फिसल गया और वह कीचड़ में गिर पड़ा। उसकी मेहनत से बनाई गई पेंटिंग पूरी तरह खराब हो गई। आर्यन फूट-फूट कर रोने लगा। उसे लगा कि उसकी सारी मेहनत बेकार चली गई।
तभी उसके दादाजी ने उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा, "बेटा, गिरने पर रोने से बेहतर है कि यह सोचो कि दोबारा कैसे खड़ा होना है।"
आर्यन ने अपने आँसू पोंछे। उसका दिल दुखा था, लेकिन उसका हौसला नहीं टूटा। वह घर गया, नए रंग लिए और फिर से चित्र बनाना शुरू किया। इस बार उसने उस दुर्घटना में बिखरे रंगों का उपयोग करके एक अनोखी कलाकृति बनाई। उत्सव में उसकी नई पेंटिंग ने सबका दिल जीत लिया। उसने हार नहीं मानी थी।