एक सुंदर गाँव में अशोक नाम का एक लड़का रहता था। उसे चित्रकारी करना बहुत पसंद था। गाँव के बड़े उत्सव के लिए उसके पिता ने उसे एक बेहतरीन ब्रश उपहार में दिया। उन्होंने प्यार से कहा, 'अशोक, इससे अपनी कला का प्रदर्शन करना।'
शुरुआत में अशोक बहुत उत्साहित था। लेकिन धीरे-धीरे उसकी आदत बदलने लगी। वह कहता, 'कल करूँगा, अभी तो बहुत समय है।' एक दिन जब वह चित्र बनाने बैठा, तो उसे नींद आने लगी। उसने सोचा, 'थोड़ी देर सो लेता हूँ, फिर ताज़गी के साथ चित्र बनाऊँगा।' जब वह जागा, तो वह भूल गया कि उसे क्या बनाना था। आलस के कारण वह बस बैठा रहा।
अचानक उत्सव का दिन आ गया। पूरा गाँव सजा हुआ था, लेकिन अशोक का कैनवास खाली था। जो लोग उसकी कला देखने का इंतज़ार कर रहे थे, वे निराश हो गए। अशोक को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसकी टालमटोल की आदत, भूलने की प्रवृत्ति और आलस ने उसके अवसर को छीन लिया था। उस दिन के बाद, अशोक ने समय की कद्र करना और हर काम समय पर करना सीख लिया।