एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक युवक रहता था। अर्जुन बुद्धिमान तो था, लेकिन उसमें एक बहुत बड़ी बुराई थी—आलस। सूरज निकल आता था, लेकिन अर्जुन दोपहर के बाद ही सोकर उठता था। उसके पिता एक मेहनती किसान थे, जो अकेले ही परिवार का पालन-पोषण करते थे। अर्जुन के आलस के कारण गाँव में उसके परिवार का नाम खराब होने लगा था। लोग कहते थे, 'अर्जुन के परिवार की साख गिर गई है, उनका बेटा बस सोता रहता है।' यह सुनकर उसके पिता को बहुत दुख होता था।
एक दिन, अर्जुन के पिता बीमार पड़ गए और काम करने में असमर्थ हो गए। घर में पैसों की तंगी हो गई। तब अर्जुन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने देखा कि कैसे उसके आलस ने उसके परिवार के सम्मान को ठेस पहुँचाई है। अगले ही दिन, वह सुबह जल्दी उठ गया और खेतों में काम करने निकल पड़ा। शुरुआत में उसे बहुत कठिनाई हुई, लेकिन उसने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे अर्जुन की मेहनत देखकर गाँव वाले हैरान रह गए। अब लोग उसे आलसी नहीं, बल्कि एक मेहनती युवक कहने लगे। उसकी मेहनत ने न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारी, बल्कि समाज में उनके सम्मान को भी वापस लौटा दिया।