एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसे चित्रकारी करने का बहुत शौक था। एक बार गाँव में एक बड़ी चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। अर्जुन का सपना था कि वह इसमें प्रथम पुरस्कार जीते। लेकिन प्रतियोगिता से ठीक पहले, भारी बारिश के कारण उसके सारे रंग और कागज़ खराब हो गए। अर्जुन बहुत दुखी होकर बैठ गया और सोचने लगा, 'यह तो मेरी किस्मत ही खराब है, अब मैं क्या कर सकता हूँ?' \नारंगी रंग के कुर्ते वाले उसके दादाजी ने उसे उदास देखा और पास आकर बोले, 'अर्जुन, बारिश होना तुम्हारी गलती नहीं है। परिस्थितियाँ हमारे वश में नहीं होतीं, और इसमें कोई शर्म की बात नहीं है। लेकिन, बुद्धि का उपयोग करके नया रास्ता न खोजना और प्रयास न करना ही असली अपमान है।'
दादाजी की बात सुनकर अर्जुन की आँखें खुल गईं। उसने हार नहीं मानी। उसने फूलों और प्राकृतिक चीजों से नए रंग बनाना सीखा। उसने कड़ी मेहनत की और प्रतियोगिता में एक बहुत ही सुंदर चित्र बनाया। उसे प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार मिला। उसने सीख लिया कि बाधाएँ आना बुरा नहीं है, बल्कि बिना प्रयास किए हार मान लेना बुरा है।