चंद्रपुर नाम का एक समृद्ध राज्य था, जहाँ आर्यन नाम का एक राजकुमार रहता था। आर्यन बहुत बुद्धिमान और साहसी था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी। वह बहुत तेज़ बोलता था और दूसरों की बात सुनने के बजाय अपनी बात कहकर चुप हो जाता था। इस कारण लोग उसकी बातों का सही अर्थ नहीं समझ पाते थे।
एक बार पड़ोसी राज्य के साथ नदी के पानी को लेकर विवाद हो गया। आर्यन गुस्से में दरबार में आया और चिल्लाकर बोला, 'वे हमारा पानी चुरा रहे हैं! हमें तुरंत सेना भेजनी चाहिए!' और बिना किसी की बात सुने वह वहाँ से चला गया।
राज्य के बुद्धिमान मंत्री विक्रम ने आर्यन को समझाया, 'राजकुमार, एक सच्चे नेता की पहचान यह है कि वह दूसरों की बातों को गहराई से समझे। जब आप बोलें, तो आपकी वाणी ऐसी होनी चाहिए कि लोग उसे सुनने के लिए उत्सुक रहें। दूसरों के शब्दों का अर्थ समझना और अपनी बात को प्रभावशाली ढंग से कहना ही असली कौशल है।'
आर्यन को अपनी गलती का एहसास हुआ। कुछ दिनों बाद, जब राजदूत आए, तो आर्यन ने शांति से बैठकर उनकी बातें सुनीं। उसने उनकी समस्याओं को समझा। फिर जब उसने बोलना शुरू किया, तो वह बहुत ही शांत, स्पष्ट और प्रभावशाली तरीके से बोला। उसकी बातों से प्रभावित होकर राजदूतों ने युद्ध के बजाय शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। आर्यन समझ गया कि सुनने की कला और बोलने का ढंग ही असली शक्ति है।