बहुत समय पहले की बात है, कवि नाम का एक युवक था। वह कोई योद्धा नहीं था, लेकिन बहुत विद्वान था। एक बार पड़ोसी राजा ने उसके राज्य पर हमला करने की योजना बनाई। राजा ने युद्ध के बजाय कवि को एक दूत के रूप में भेजने का निर्णय लिया। राजा ने कहा, 'कवि, तलवार से केवल जान ली जा सकती है, लेकिन बुद्धि से जीवन बचाया जा सकता है।'
कवि शत्रु के दरबार में पहुँचा। वहाँ के मंत्री बहुत ज्ञानी और चतुर थे। उन्होंने कवि को अपनी बातों में फँसाने की बहुत कोशिश की। लेकिन कवि घबराया नहीं। उसने अपनी नैतिकता और तर्कशक्ति का उपयोग करके हर सवाल का जवाब दिया। उसने युद्ध के बजाय शांति और दोनों देशों के लाभ की बात की। उसकी बुद्धिमानी देखकर शत्रु राजा प्रभावित हुआ और युद्ध टल गया। बिना किसी लड़ाई के राज्य सुरक्षित रहा।