बहुत समय पहले की बात है, एक विशाल साम्राज्य में कविन नाम का एक युवक रहता था। उसके राजा ने उसे एक पड़ोसी राजा के पास शांति का संदेश लेकर जाने के लिए चुना। वह पड़ोसी राजा बहुत क्रोधी स्वभाव का था।
कविन जानता था कि एक अच्छा दूत बनने के लिए तीन गुण बहुत ज़रूरी हैं। पहला, पवित्रता यानी सच्चाई—राजा की बात को बिना बदले वैसा ही कहना। दूसरा, सहयोग—दूसरे मंत्रियों के साथ मिलकर काम करना। तीसरा, साहस—मुसीबत के समय डरे बिना खड़े रहना।
जब कविन शत्रु देश पहुँचा, तो वहाँ के मंत्रियों ने उसे डराने की कोशिश की। 'हमारे राजा बहुत गुस्से वाले हैं, तुम यहाँ से चले जाओ!' उन्होंने चेतावनी दी। कविन डरा नहीं। उसने धैर्य से मंत्रियों से बात की और उनका सहयोग प्राप्त किया। जब वह क्रोधित राजा के सामने खड़ा हुआ, तो उसने पूरी सच्चाई और साहस के साथ संदेश सुनाया। कविन की सच्चाई और निडरता देखकर राजा का गुस्सा शांत हो गया। इस तरह युद्ध टल गया और दोनों राज्यों में शांति हो गई।