चंद्रवती साम्राज्य में अर्जुन नाम का एक युवक रहता था। वह एक प्रतिष्ठित परिवार से था, लेकिन दरबार के बुजुर्ग उसे केवल एक बच्चा समझते थे। उसके चाचा, मंत्री विक्रम, एक अनुभवी सलाहकार थे। एक बार राजा ने सूखे की समस्या से निपटने के लिए एक योजना बनाई। सभा में अर्जुन ने पानी के प्रबंधन का एक बहुत ही सटीक सुझाव दिया। विक्रम ने अन्य मंत्रियों से धीरे से कहा, 'यह तो हमारे ही परिवार का छोटा बच्चा है, इसकी बातों पर ध्यान देने की क्या ज़रूरत?'
लेकिन जब भीषण सूखा पड़ा, तो केवल अर्जुन की योजना ही काम आई और हज़ारों लोगों की जान बच गई। राजा ने अर्जुन की बुद्धिमत्ता की सराहना की और उसे एक महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया। तब विक्रम को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझा कि किसी व्यक्ति को उसकी उम्र या पारिवारिक संबंध से नहीं, बल्कि उसके ज्ञान और पद की गरिमा से सम्मान देना चाहिए।