एक छोटे से गाँव में लियो नाम का एक लड़का रहता था। लियो बहुत बातूनी था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी—वह किसी की बात पूरी होने से पहले ही बीच में बोलना शुरू कर देता था।
एक दिन गाँव के बड़े-बुजुर्गों की सभा बैठी थी। गाँव के कुएँ के पानी को लेकर एक समस्या पर चर्चा हो रही थी। सभी लोग बहुत गंभीर थे। तभी लियो अचानक खड़ा हो गया और चिल्लाकर बोला, "यह सब उन बकरियों की वजह से हो रहा है! वे बहुत शरारती हैं!"
सभा में सन्नाटा छा गया। गाँव की मुखिया, सारा ने प्यार से लियो को समझाया, "लियो, बोलने से पहले तुम्हें यह देखना चाहिए कि यहाँ कौन बैठा है और मामला कितना गंभीर है। जो व्यक्ति परिस्थिति और सभा को समझकर बोलता है, वही बुद्धिमान है।"
लियो को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह चुपचाप बैठ गया और ध्यान से सबकी बातें सुनने लगा। उसने समझा कि समस्या बकरियों की नहीं, बल्कि पुरानी पाइपलाइन की थी। जब उसने शांति से अपनी बात रखी, तो सबने उसकी प्रशंसा की। लियो ने सीख लिया कि बोलने से पहले सोचना कितना ज़रूरी है।