एक सुंदर घाटी में आर्यन और उसके पिता विक्रम रहते थे। एक बार गाँव में भीषण तूफान और बाढ़ आ गई। सभी लोग बहुत डरे हुए थे।
विक्रम आर्यन को एक ऊँची पहाड़ी पर बने पुराने पत्थर के किले में ले गए। आर्यन ने डरते हुए पूछा, 'पिताजी, क्या हम यहाँ सुरक्षित रहेंगे?'
विक्रम ने मुस्कुराते हुए कहा, 'हाँ बेटा, क्योंकि एक सच्चा किला वही है जो कभी हार न माने।' किले की दीवारें इतनी ऊँची और मज़बूत थीं कि बाढ़ का पानी भी उन्हें छू नहीं सका। किले के भीतर अनाज के बड़े भंडार और पीने के पानी के कुएँ थे। तूफान के दौरान भी किले के अंदर रहने वाले लोग बिना किसी डर के शांति से रह सकते थे क्योंकि किला बहुत स्थिर था।
चूंकि किला न तो आसानी से जीता जा सकता था, न ही वहाँ भोजन की कमी थी, और वह रहने वालों को पूरी सुरक्षा देता था, इसलिए सब सुरक्षित रहे। आर्यन समझ गया कि किला केवल पत्थरों का ढेर नहीं, बल्कि सुरक्षा और संपन्नता का आधार है।