बहुत समय पहले, विक्रम नाम का एक राजा था। अर्जुन नाम का एक बहादुर सेनापति उसकी सेना का नेतृत्व करता था। एक भीषण युद्ध के दौरान, विक्रम की सेना कमजोर पड़ने लगी। दुश्मन बहुत शक्तिशाली थे और सेना के सैनिक डरकर भागने लगे।
लेकिन, अर्जुन और उसके कुछ वफादार सैनिकों ने राजा का साथ नहीं छोड़ा। भले ही वे घायल थे और उनकी संख्या कम हो गई थी, फिर भी वे राजा की रक्षा के लिए ढाल बनकर खड़े रहे। रोहन नाम के एक युवा सैनिक ने पूछा, 'सेनापति, हम हार रहे हैं, फिर भी हम यहाँ क्यों खड़े हैं?' अर्जुन ने शांति से उत्तर दिया, 'जब जीत पक्की हो, तब तो सब साथ चलते हैं। लेकिन सच्चा योद्धा वही है जो हार के डर और चोटों के बावजूद अपने राजा के साथ अडिग खड़ा रहे।' उनकी इस हिम्मत को देखकर बाकी सैनिक भी वापस लौट आए और उन्होंने मिलकर युद्ध जीता।