एक शांत घाटी में लियो नाम का एक लड़का रहता था। उसके पिता गाँव की एक छोटी सी सुरक्षा टुकड़ी के मुखिया थे। उन सैनिकों के पास न तो लड़ने का बहुत बड़ा अनुभव था और न ही बहुत अधिक शारीरिक बल। वे साधारण लोग थे।
एक बार, उनके गाँव में एक बहुत बड़ा उत्सव मनाया गया। उत्सव में शामिल होने के लिए एक दूर के राज्य की एक विशाल सेना वहाँ पहुँची। उस सेना के हथियारों और ताकत को देखकर गाँव वाले डर गए। लियो को भी लगा कि उसकी छोटी सी टुकड़ी उनके सामने कुछ भी नहीं है।
लियो के पिता ने एक योजना बनाई। उन्होंने लियो से कहा, 'हमारे पास युद्ध जीतने की शक्ति भले ही न हो, लेकिन हम दुनिया को अपना अनुशासन और गरिमा दिखा सकते हैं।'
उत्सव के दिन, लियो की टुकड़ी परेड के लिए निकली। उन्होंने चमकदार कपड़े पहने थे और सुंदर घोड़ों पर सवार थे। वे बहुत ही अनुशासन और लय के साथ आगे बढ़ रहे थे। जहाँ बड़ी सेना डरावनी लग रही थी, वहीं लियो की टुकड़ी बहुत ही भव्य और सुंदर लग रही थी। लोग मंत्रमुग्ध होकर उन्हें देखने लगे। यहाँ तक कि बड़ी सेना के सेनापतियों ने भी उनके अनुशासन की प्रशंसा की। उन्होंने युद्ध नहीं जीता, लेकिन अपनी भव्यता से सबका दिल जीत लिया और सम्मान पाया।