एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसके बहुत सारे दोस्त थे, लेकिन रोहन उसका सबसे प्रिय मित्र था। जब भी अर्जुन के पास नए खिलौने या मिठाइयाँ होती थीं, रोहन हमेशा उसके साथ रहता था। वे दोनों बहुत मजे करते थे।
लेकिन एक समय ऐसा आया जब अर्जुन के परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। अर्जुन के पास अब न तो नए खिलौने थे और न ही मिठाइयाँ। उस कठिन समय में, रोहन अर्जुन के पास आना छोड़ दिया। वह दूसरे अमीर बच्चों के साथ खेलने लगा क्योंकि उसे लगा कि अर्जुन के साथ रहने में अब कोई फायदा नहीं है।
कुछ समय बाद, अर्जुन का परिवार फिर से समृद्ध हो गया। जैसे ही अर्जुन के पास फिर से खिलौने आए, रोहन दौड़ता हुआ आया और बोला, "अर्जुन, मेरे दोस्त! चलो फिर से साथ खेलते हैं!" अर्जुन ने रोहन की ओर देखा और उसे दुख हुआ। उसे समझ आ गया कि रोहन का दोस्ती केवल फायदे के लिए थी। अर्जुन ने अपने उस मित्र कबीर को याद किया जो मुश्किल समय में उसके साथ खड़ा रहा था। अर्जुन समझ गया कि जो दोस्ती केवल लाभ देखकर की जाए, उसका कोई मूल्य नहीं होता।