एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही सीधा और मिलनसार था। एक बार अर्जुन के पिता ने एक छोटा सा व्यापार शुरू करने का फैसला किया। अर्जुन का दोस्त रोहन उसके पास आया और बड़े उत्साह से बोला, 'अर्जुन, यह बहुत अच्छा विचार है! तुम ज़रूर सफल होगे और मैं हमेशा तुम्हारे साथ खड़ा रहूँगा।' रोहन की बातों में आकर अर्जुन ने अपने पिता की मदद करने के लिए अपनी जमा पूँजी भी उस व्यापार में लगा दी।
कुछ महीनों बाद, व्यापार में थोड़ा नुकसान हुआ। उस मुश्किल समय में रोहन अर्जुन की मदद के लिए नहीं आया। बल्कि, अर्जुन ने रोहन को दूसरे लड़कों से यह कहते सुना, 'अर्जुन बहुत मूर्ख है, उसने सारा पैसा बर्बाद कर दिया।' अर्जुन को बहुत दुख हुआ। उसे समझ आ गया कि रोहन की बातों में मिठास तो थी, लेकिन उसके दिल में अर्जुन के लिए सच्ची दोस्ती नहीं थी। उस दिन अर्जुन ने एक बड़ा सबक सीखा। उसने कड़ी मेहनत की और अपना व्यापार फिर से खड़ा किया। उसने जान लिया कि केवल मीठी बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। बाद में, उसके सच्चे मित्र विक्रम ने बिना किसी दिखावे के, चुपचाप उसका साथ दिया।