एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक युवक रहता था। उसे लगता था कि वह सब कुछ जानता है। एक दिन, गाँव के बड़े-बुजुर्गों के बीच गाँव के पुराने कुएँ की मरम्मत करने को लेकर चर्चा हो रही थी।
अर्जुन ने बीच में टोकते हुए कहा, 'यह काम मैं बहुत अच्छे से कर सकता हूँ!' बुजुर्गों ने उसे समझाया, 'अर्जुन, इसके लिए अनुभव और ज्ञान की ज़रूरत है, बिना सोचे-समझे मत करो।' लेकिन अर्जुन ने उनकी बात नहीं मानी।
उसने काम शुरू किया, लेकिन उसे काम करने का सही तरीका नहीं पता था। उसकी गलतियों की वजह से कुएँ की बनावट ही बिगड़ गई और वह पूरी तरह खराब हो गया। अर्जुन न केवल काम में असफल हुआ, बल्कि उसे पूरे गाँव में अपमान का सामना करना पड़ा। उसने सीखा कि बिना ज्ञान के किसी काम में हाथ डालना खुद को मुसीबत में डालने जैसा है।