एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन बहुत बुद्धिमान था, लेकिन उसमें एक कमी थी—वह किसी से प्यार से बात नहीं करता था। उसे लगता था कि उसे किसी की ज़रूरत नहीं है। उसका दोस्त रोहन हमेशा उसके साथ खेलने की कोशिश करता, पर अर्जुन उसे टाल देता था।
एक दिन गाँव के उत्सव के लिए भारी लकड़ियाँ ढोनी थीं। अर्जुन ने खुद को ताकतवर दिखाने के लिए एक बहुत बड़ी लकड़ी अकेले उठाने की कोशिश की। उसने बहुत ज़ोर लगाया, लेकिन लकड़ी टस से मस नहीं हुई। वह थककर हार मानकर बैठ गया। तभी रोहन और उसके अन्य दोस्त वहाँ आए। रोहन ने मुस्कुराते हुए कहा, 'अर्जुन, हम सब मिलकर इसे उठाएंगे!' अर्जुन पहले तो हिचकिचाया, पर फिर मान गया। जब सबने मिलकर ज़ोर लगाया, तो वह भारी लकड़ी आसानी से उठ गई। अर्जुन समझ गया कि बिना प्रेम और बिना दोस्तों के सहयोग के, बड़ी से बड़ी मुश्किल को हराना नामुमकिन है।