एक छोटे से गाँव में आर्यन और रोहन नाम के दो पक्के दोस्त रहते थे। एक दिन एक दौड़ प्रतियोगिता में आर्यन जीत गया। रोहन को थोड़ा बुरा लगा। अगले दिन, रोहन ने सोचा कि वह आर्यन के साथ एक मज़ाक करेगा। उसने आर्यन की पसंदीदा गेंद कहीं छुपा दी। रोहन ने मन ही मन सोचा, 'यह तो बस एक खेल है, आर्यन को परेशान होते देखना मज़ेदार होगा!'
लेकिन जब रोहन ने देखा कि आर्यन अपनी गेंद न मिलने के कारण बहुत दुखी होकर अकेला बैठा है, तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। उसे समझ आया कि मज़ाक के नाम पर भी किसी के मन में कड़वाहट या नफरत पैदा करना गलत है। नफरत का भाव खेल में भी शोभा नहीं देता। रोहन ने आर्यन के पास जाकर उससे माफी मांगी और उसकी गेंद वापस कर दी। दोनों फिर से खुशी-खुशी दोस्त बन गए।