एक शांत गाँव में कदिर नाम का एक युवक अपने मेहनती पिता सोमू के साथ रहता था। सोमू ने कदिर के भविष्य के लिए जीवन भर मेहनत करके पैसे बचाए थे। लेकिन कदिर धीरे-धीरे गलत रास्ते पर चल पड़ा। वह गाँव में होने वाले जुए के खेलों में अपना समय बिताने लगा।
शुरुआत में, जब कदिर ने थोड़े पैसे जीते, तो उसे बहुत खुशी हुई। लेकिन जल्द ही उसका लालच बढ़ गया। उसे लगा कि अगर वह एक बार और खेलेगा, तो वह सब कुछ जीत लेगा। इसी जिद में उसने एक दिन सोमू की जीवन भर की कमाई जुए में लगा दी।
कुछ ही दिनों में, कदिर के पास कुछ भी नहीं बचा। जुए की उस जगह और उन पासे ने उसे केवल दुख और खालीपन दिया। अपने पिता की आँखों में आँसू देखकर कदिर को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझा कि जुए के प्रति उसके लगाव ने उसके परिवार को गरीबी की कगार पर खड़ा कर दिया है। कदिर ने जुए की लत को पूरी तरह छोड़ दिया और फिर से मेहनत करके अपने परिवार का सम्मान और खुशियाँ वापस पाईं।