एक शांत गाँव में अर्जुन नाम के एक डॉक्टर रहते थे। वे बहुत ही समझदार और धैर्यवान थे। एक दिन गाँव के बुजुर्ग, राघव जी, अचानक बीमार पड़ गए। उन्हें सिरदर्द और बहुत कमजोरी महसूस हो रही थी। गाँव के लोग घबराकर दौड़ते हुए आए और कहने लगे, 'जल्दी से कोई कड़वी दवा दीजिए, उन्हें बुखार है!'
लेकिन अर्जुन घबराए नहीं। उन्होंने पहले राघव जी से शांति से बात की। उन्होंने पूछा, 'चाचा जी, यह दर्द कब से शुरू हुआ? क्या आपने खाने-पीने में कुछ बदलाव किया है? क्या आप ठीक से सो पा रहे हैं?' राघव जी ने सोचकर कहा, 'पिछले कुछ दिनों से काम के बोझ के कारण मेरी नींद पूरी नहीं हो रही है, और कल मैंने कुछ बहुत तीखा खाना खा लिया था।'
अर्जुन समझ गए कि समस्या केवल सिरदर्द नहीं, बल्कि नींद की कमी और गलत खान-पान है। उन्होंने केवल दवा ही नहीं दी, बल्कि उन्हें पर्याप्त आराम करने और हल्का भोजन करने की सलाह भी दी। कुछ ही दिनों में राघव जी बिल्कुल ठीक हो गए। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'अर्जुन, तुमने सिर्फ बीमारी का इलाज नहीं किया, बल्कि उसकी जड़ को पकड़ा है!'