एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। एक दिन, जब वह और उसका दोस्त रोहन जंगल में खेल रहे थे, उन्हें झाड़ियों में फंसी एक छोटी चिड़िया दिखी। रोहन ने मज़ाक में कहा, 'चलो इसे एक डंडे से छेड़ते हैं।' अर्जुन ने तुरंत उसे रोका और कहा, 'नहीं रोहन, देखो यह कितनी तकलीफ में है। किसी जीव को नुकसान न पहुँचाना ही असली भलाई है।' उन्होंने चिड़िया को सुरक्षित निकाला और उसे पानी पिलाया।
कुछ दिनों बाद, स्कूल में उनके सहपाठी विक्रम से गलती से एक मिट्टी का बर्तन टूट गया। कुछ बच्चे विक्रम का मज़ाक उड़ाने के लिए यह बात सबको बताने की योजना बना रहे थे। अर्जुन को यह बात पता थी, लेकिन उसने किसी को कुछ नहीं बताया। उसने सोचा कि किसी की गलती बताकर उसे शर्मिंदा करना सही नहीं है। अर्जुन की इस समझदारी को देखकर शिक्षक ने उसकी प्रशंसा की। अर्जुन ने सीखा कि सच्चा इंसान वही है जो जीव पर दया करे और दूसरों की कमियों को न फैलाए।