एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक बहुत ही कुशल धनुर्धर रहता था। उसे अपनी कला पर बहुत गर्व था। एक दिन जब वह अभ्यास कर रहा था, उसने देखा कि लियो नाम का एक छोटा लड़का लकड़ी की एक साधारण टहनी से तीरंदाजी का खेल खेल रहा है।
अर्जुन हँसते हुए बोला, 'बच्चे, यह कोई खेल नहीं है, इसके लिए बहुत अभ्यास चाहिए।' लियो ने विनम्रता से कहा, 'श्रीमान, क्या हम एक प्रतियोगिता कर सकते हैं?' अर्जुन ने चुनौती स्वीकार कर ली। अर्जुन ने अपना सबसे बेहतरीन धनुष उठाया, लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि उस छोटे लड़के ने अपनी लकड़ी की टहनी से लक्ष्य को अर्जुन से भी बेहतर तरीके से भेदा। अर्जुन हार गया।
पहले तो अर्जुन को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई और गुस्सा भी आया। लेकिन फिर उसने सोचा कि यदि एक छोटा बच्चा उसे हरा सकता है, तो निश्चित रूप से उस बच्चे में कोई विशेष गुण है। उसने अपना अहंकार त्याग दिया और उस लड़के से नई तकनीकें सीखने लगा। धीरे-धीरे अर्जुन एक और भी महान धनुर्धर बन गया।