एक शांत गाँव में आर्यन नाम का एक व्यापारी रहता था। आर्यन बहुत मेहनती था, लेकिन उसकी एक बड़ी कमी थी—वह केवल धन इकट्ठा करने के बारे में सोचता था। उसे लगता था कि जितने अधिक सिक्के उसके पास होंगे, वह उतना ही बड़ा आदमी बनेगा। एक बार गाँव में भीषण सूखा पड़ा। फसलें बर्बाद हो गईं और लोग दाने-दाने को तरसने लगे। आर्यन की पड़ोसन, मीरा दादी, के पास खाने के लिए कुछ नहीं बचा था।
आर्यन के पास सोने के सिक्कों से भरा एक बड़ा संदूक था। जब मीरा दादी ने उससे मदद मांगी, तो आर्यन ने सोचा, 'अगर मैंने ये पैसे दे दिए, तो मैं अपनी नई नाव नहीं खरीद पाऊँगा।' उसने उनकी मदद नहीं की। कुछ समय बाद, भारी बारिश के कारण आर्यन के घर की छत गिर गई और वह मलबे में फंस गया। वह मदद के लिए चिल्लाया, लेकिन गाँव वालों ने उसकी मदद करने में बहुत देर कर दी, क्योंकि आर्यन ने कभी किसी का भला नहीं किया था। अंत में, मीरा दादी के पोते ने उसकी जान बचाई। आर्यन को समझ आया कि धन से अधिक महत्वपूर्ण दूसरों की मदद करना और एक अच्छा नाम कमाना है।