एक छोटे से गाँव में मारन नाम का एक किसान अपनी पत्नी नीला और बेटे कविन के साथ रहता था। एक साल गाँव में भीषण सूखा पड़ा। फसलें सूख गईं और मारन का परिवार मुश्किल में आ गया।
मारन ने हार नहीं मानी। वह रोज़ सुबह सूरज निकलने से पहले दूर की नदी से पानी लाने के लिए निकल पड़ता था। यह बहुत थका देने वाला काम था। लेकिन नीला बहुत समझदार थी। उसने देखा कि सिर्फ पानी लाने से काम नहीं चलेगा। उसने गाँव के बुजुर्गों से पूछा कि कम पानी में कौन सी फसलें उग सकती हैं। उसने पानी को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचाने का एक आसान तरीका भी बनाया।
मारन की कड़ी मेहनत और नीला की सूझबूझ ने मिलकर कमाल कर दिया। जहाँ बाकी खेत सूख गए थे, वहीं मारन का छोटा सा बगीचा हरा-भरा हो गया। उनकी मेहनत और सही योजना ने परिवार को गरीबी से बाहर निकाल लिया। कविन ने सीखा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए मेहनत और बुद्धि दोनों की ज़रूरत होती है।