एक शांत गाँव में सोमू नाम के एक बुजुर्ग रहते थे। वे बहुत सम्मानित व्यक्ति थे और उनके शब्द सबके लिए प्रेरणा थे। उनका परिवार पीढ़ियों से अपनी ईमानदारी और प्रतिष्ठा के लिए जाना जाता था। लेकिन उनके बेटे रवि को एक बुरी आदत थी—दिखावे और विलासिता की अत्यधिक चाहत।
एक बार, रवि ने एक व्यापारी से बहुत ऊँची ब्याज दर पर भारी मात्रा में पैसा उधार लिया। उसने वादा किया कि वह जल्द ही पैसा लौटा देगा। लेकिन उस पैसे से उसने महंगे कपड़े और गहने खरीद लिए ताकि वह गाँव में अमीर दिख सके। कुछ दिनों तक तो सब ठीक रहा, लेकिन जब कर्ज चुकाने का समय आया, तो रवि के पास कुछ नहीं था।
कर्ज न चुका पाने के कारण, रवि को लोगों के सामने हाथ फैलाना पड़ा। जो रवि कभी बड़े गर्व और गरिमा के साथ बात करता था, उसे अब पैसों के लिए गिड़गिड़ाना पड़ रहा था। उसके इस लालच ने न केवल उसके परिवार की वर्षों पुरानी प्रतिष्ठा को मिट्टी में मिला दिया, बल्कि उसकी अपनी गरिमा को भी खत्म कर दिया। रवि को अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन वह समझ गया कि खोई हुई इज्जत वापस पाना बहुत मुश्किल है।