एक समय की बात है, सैमुअल और उसकी माँ मार्था एक बड़े घर में खुशी-खुशी रहते थे। सैमुअल एक सफल व्यापारी था और पूरे शहर में उसका बहुत सम्मान था। लेकिन, व्यापार में हुए भारी नुकसान के कारण सैमुअल ने अपनी सारी संपत्ति खो दी। वह एक अमीर आदमी से बदलकर एक छोटी सी झोपड़ी में रहने वाला गरीब व्यक्ति बन गया।
एक दिन, सैमुअल अपनी माँ से मिलने गया। मार्था अब ऊँचे समाज के लोगों के साथ घुल-मिल गई थी। जब सैमुअल फटे हुए कपड़ों में वहाँ पहुँचा, तो मार्था ने उसे गले लगाने के बजाय एक अजनबी की तरह देखा। उसकी आँखों में ममता के बजाय संकोच था। उसने बहुत ही औपचारिक तरीके से पूछा, 'तुम कौन हो और यहाँ क्यों आए हो?' सैमुअल का दिल टूट गया। उसे एहसास हुआ कि गरीबी ने न केवल उसकी संपत्ति छीनी, बल्कि उसकी माँ की नज़रों में उसे एक अजनबी भी बना दिया।