एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत मिलनसार था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी—वह दूसरों के राज़ को राज़ नहीं रख पाता था। उसे लगता था कि राज़ बताना एक बोझ है जिसे वह तुरंत उतार देना चाहता है।
एक दिन उसका सबसे अच्छा दोस्त रोहन बहुत उदास होकर उसके पास आया। रोहन ने धीरे से कहा, 'अर्जुन, मैंने गलती से अपने पिताजी की पसंदीदा घड़ी तोड़ दी है। कृपया वादा करो कि तुम यह बात किसी को नहीं बताओगे। यह हमारे बीच ही रहना चाहिए।' अर्जुन ने वादा किया, 'मैं वादा करता हूँ, रोहन। तुम्हारा राज़ मेरे पास सुरक्षित है।'
लेकिन अगले दिन स्कूल में, वह राज़ अर्जुन के दिमाग में ढोल की तरह बजने लगा। वह खुद को रोक नहीं पाया और एक सहपाठी से कहने लगा, 'क्या तुम्हें पता है रोहन ने क्या किया?' देखते ही देखते, पूरी कक्षा में यह बात फैल गई।
जब रोहन स्कूल आया, तो उसने देखा कि सब उसे देखकर फुसफुसा रहे हैं। उसे बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई और उसका दिल टूट गया। उसे एहसास हुआ कि उसके सबसे अच्छे दोस्त ने उसका भरोसा तोड़ दिया है। अर्जुन को अपनी गलती का पछतावा हुआ। उसने सीखा कि किसी का राज़ दूसरों को बताना, ढोल बजाकर पूरे गाँव को खबर सुनाने के समान है।