एक सुंदर से गाँव में आर्यन नाम का एक युवक रहता था। वह बहुत ऊर्जावान था, लेकिन एक दिन उसे तेज़ बुखार आ गया। वह बिस्तर पर पड़ा दर्द से कराह रहा था। गाँव के वैद्य ने आकर उसे कड़वी दवाइयाँ और जड़ी-बूटियाँ दीं। आर्यन ने सब कुछ लिया, लेकिन उसके चेहरे की उदासी कम नहीं हुई।
तभी उसकी प्रिय मीरा वहाँ आई। उसके पास कोई दवा की शीशी नहीं थी, बस उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान थी। वह आर्यन के पास बैठी और बड़े प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरने लगी। मीरा की मीठी बातों और उसके स्पर्श ने आर्यन के भीतर एक नई शक्ति भर दी। मीरा के पास होने से उसे ऐसा लगा जैसे उसका सारा दर्द गायब हो गया हो। देखते ही देखते आर्यन का चेहरा खिल उठा और उसे बेहतर महसूस होने लगा। वैद्य यह देखकर हैरान रह गए और बोले, 'आमतौर पर बीमारी के लिए दवा अलग होती है, लेकिन इस प्रेम की व्याधि के लिए तो प्रेम ही औषधि है!'
आर्यन समझ गया कि दवा शरीर को ठीक करती है, लेकिन प्रेम आत्मा को सुकून देता है।