एक सुंदर से गाँव में ईशान और माया नाम का एक जोड़ा रहता था। ईशान एक बहुत अच्छा चित्रकार था। एक बार, ईशान को एक बड़ी चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए दूर शहर जाना पड़ा। जाते समय माया बहुत उदास थी। उसने पूछा, 'आपके बिना मैं कैसे रहूँगी?'
ईशान ने उसका हाथ थामकर बड़े विश्वास से कहा, 'माया, डरो मत। मैं जल्द ही वापस आ जाऊँगा। हमारा प्रेम हमें हमेशा जोड़े रखेगा। तुम हिम्मत रखना।' उसके उन स्पष्ट शब्दों ने माया को बहुत साहस दिया।
लेकिन यात्रा के दौरान कुछ मुश्किलें आ गईं। ईशान बीमार पड़ गया, जिसके कारण वह समय पर नहीं लौट सका। कई हफ्ते बीत गए। गाँव के लोग माया से कहने लगे, 'तुम उसकी बातों पर इतना भरोसा क्यों कर रही हो? क्या तुम्हें नहीं लगता कि वह वापस नहीं आएगा?'
माया को दुख तो हुआ, लेकिन वह टूटी नहीं। उसने शांति से कहा, 'उन्होंने मुझे वचन दिया है और उनके शब्द सच्चे हैं। उन्हें विश्वास करने में मेरा कोई दोष नहीं है।' माया के इसी अटूट विश्वास ने उसे शक्ति दी। अंत में, ईशान ठीक होकर वापस आया और अपना वादा निभाया। माया के विश्वास ने ही उनके प्रेम को बचाए रखा।