एक छोटे से गाँव में मीरा नाम की एक स्त्री रहती थी। वह अपने पति अर्जुन से बहुत प्रेम करती थी। लेकिन अर्जुन अक्सर अपने काम में इतना व्यस्त रहता था कि वह मीरा के प्रेम और उसकी भावनाओं का ध्यान नहीं रख पाता था। एक बार अर्जुन को काम के सिलसिले में कई दिनों के लिए शहर जाना पड़ा। मीरा बेसब्री से उसके लौटने का इंतज़ार कर रही थी।
जब अर्जुन वापस आया, तो मीरा को वह प्यार और अपनापन नहीं मिला जिसकी उसने उम्मीद की थी। अर्जुन बहुत ही रूखा और उदासीन व्यवहार कर रहा था। मीरा का मन उदास हो गया। उस रात जब मीरा सोई, तो उसने एक बहुत ही सुंदर सपना देखा। सपने में अर्जुन बहुत प्यार से उससे बातें कर रहा था और उसे गले लगा रहा था। मीरा उस सपने में बहुत खुश थी।
लेकिन सुबह जब उसकी आँख खुली, तो वह खुशी एक गहरे दुख में बदल गई। सपने का वह प्यार करने वाला इंसान हकीकत में उसके सामने नहीं था। मीरा को बहुत बुरा लगा। उसने सोचा, 'जो इंसान जागते हुए मुझे थोड़ा सा भी प्यार नहीं दे सकता, वह मेरे सपनों में आकर मुझे क्यों तड़पाता है?' सपने की उस मिठास ने हकीकत की कड़वाहट को और बढ़ा दिया था। मीरा ने महसूस किया कि जो व्यक्ति असलियत में साथ नहीं देता, वह सपनों के ज़रिए भी सिर्फ दर्द ही देता है।