एक सुंदर गाँव में आर्यन नाम का एक चित्रकार रहता था। वह एक बहुत ही सुंदर चित्र बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे महसूस हो रहा था कि कुछ कमी है। उसका मन अशांत था। उसने सोचा, 'मैं इस पूर्णता को कहाँ ढूँढूँ? मेरा मन भटक रहा है।'
तभी उसकी पत्नी मीरा उसके पास आई और उसका हाथ थाम लिया। मीरा की आँखों में जो प्यार और शांति थी, उसने आर्यन के मन को छू लिया। उस पल आर्यन को अहसास हुआ कि वह जिस सुंदरता और सुकून की तलाश बाहर कर रहा था, वह कहीं दूर नहीं है। उसकी प्रियतमा मीरा उसके विचारों में, उसकी धड़कनों में, उसके भीतर ही बसी है। जब उसका प्रियतम उसके हृदय में ही है, तो उसके मन को कहीं और जाने की ज़रूरत ही क्या है?