एक सुंदर से गाँव में ईथन नाम का एक युवक रहता था। वह माया से बहुत प्रेम करता था। माया का परिवार बहुत समृद्ध था, लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारण उसके पिता ने अपनी सारी संपत्ति खो दी। माया का परिवार बहुत दुखी और अकेला हो गया।
जब माया के पिता की आर्थिक स्थिति खराब हुई, तो उनके दोस्त और रिश्तेदार भी उनसे दूर होने लगे। सबको लगा कि अब उनका कोई काम नहीं है। माया बहुत उदास थी। उसने अपने मन में सोचा, 'क्या मुझे भी उनसे दूर हो जाना चाहिए? क्या अकेले पड़ चुके व्यक्ति का कोई नहीं होता?'
ईथन ने माया की उदासी देखी और उसके पास आकर कहा, 'माया, यह मत सोचो कि सब कुछ खो देने वाले व्यक्ति के पास कोई नहीं होता। अगर हम उनके साथ खड़े रहें, तो वे कभी अकेले नहीं होंगे। सच्चे प्रेम की परीक्षा सुख में नहीं, बल्कि दुख में साथ निभाने में होती है।'
ईथन की बात सुनकर माया की आँखें खुल गईं। वह अपने पिता के पास गई और उनका हाथ थामकर कहा, 'पिताजी, मैं हमेशा आपके साथ हूँ।' माया के इस प्रेम ने उसके पिता को फिर से जीने की हिम्मत दी। माया समझ गई कि मुश्किल समय में साथ देना ही सबसे बड़ा धर्म है।