एक शांत गाँव में इलंगो और नीला रहते थे। वे एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। एक दिन इलंगो को पता चला कि नीला सभी के साथ बहुत अधिक घुलमिल जाती है और सबका ध्यान खींचने की कोशिश करती है। लोगों का कहना था कि जो स्त्री सबके लिए बहुत सुलभ होती है, वह अपनी गरिमा खो देती है।
इलंगो को इस बात से गहरा दुख हुआ। उसने नीला से कहा, 'नीला, यदि तुम सबको खुश करने और सबका ध्यान पाने के लिए अपनी मर्यादा भूल जाओगी, तो तुम मेरे लिए वह विशेष नहीं रहोगी जो तुम हो। यदि तुम सबके लिए साधारण बन जाओगी, तो मैं तुम्हें अपना अनमोल रत्न कैसे मानूँगा?'
नीला को पहले बुरा लगा, लेकिन फिर उसे इलंगो की बात की गहराई समझ आई। उसने महसूस किया कि आत्म-सम्मान और गरिमा बनाए रखना कितना आवश्यक है। उसने अपने व्यवहार में शालीनता लाई और अपने व्यक्तित्व की गरिमा को बनाए रखा। इससे उनका रिश्ता और भी गहरा और सम्मानजनक हो गया।