एक सुंदर से गाँव में अर्जुन और मीरा नाम के एक पति-पत्नी रहते थे। उनके बीच अक्सर छोटी-मोटी अनबन हो जाती थी। एक दिन, एक मामूली सी बात पर मीरा को बहुत गुस्सा आ गया और उसने अर्जुन से बात करना बंद कर दिया। वह अपने गुस्से और ज़िद में डूबी रही।
अर्जुन को बुरा लगा, लेकिन उसने पलटकर गुस्सा नहीं किया। उसने धैर्य बनाए रखा। कुछ घंटों बाद, जब मीरा को भूख और थकान महसूस हुई, तो अर्जुन ने चुपचाप उसके लिए उसका पसंदीदा गरमा-गरम खाना बनाया और उसके पास ले आया। अर्जुन की इस ममता और प्यार भरी दृष्टि ने मीरा के गुस्से को धीरे-धीरे पिघला दिया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने अर्जुन से माफी मांगकर उसे गले लगा लिया।
पास ही खड़े एक बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए कहा, 'असली विजेता वह नहीं जो बहस जीतता है, बल्कि वह है जो अपने साथी के गुस्से को प्रेम से जीत लेता है।' मीरा का गुस्सा अर्जुन के प्रेम के सामने हार गया, और इससे उनका रिश्ता और भी गहरा हो गया।