विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय के दरबार में तेनाली रामन नाम का एक चतुर मंत्री रहता था। एक दिन राजा ने रामन की बुद्धिमानी की परीक्षा लेने के लिए एक चुनौती दी: "रामन, तुम दिल्ली जाओ और सम्राट बाबर को अपनी चतुराई से प्रभावित करके कोई बड़ा इनाम जीतकर लाओ। तभी मैं मानूँगा कि तुम वास्तव में बुद्धिमान हो।"
रामन दिल्ली के लिए निकल पड़ा। लेकिन राजा ने चुपके से बाबर को एक संदेश भेजा था: "तेनाली रामन बहुत मजाकिया है। जब वह अपनी कला दिखाएगा, तो सब हंसने लगेंगे। इसलिए यह आदेश है कि दरबार में कोई भी न हंसे।"
ya जब रामन ने दरबार में अपनी चुटकुले सुनाए, तो सब हँसना चाहते थे, लेकिन सम्राट के आदेश के कारण सभी मंत्री और सैनिक अपने चेहरे गंभीर बनाए बैठे रहे। रामन समझ गए कि यहाँ कुछ गड़बड़ है और वे चुपचाप दरबार से बाहर निकल आए।
सम्राट बाबर जब महल के बगीचे में टहल रहे थे, तब उन्होंने देखा कि एक वृद्ध व्यक्ति एक छोटा पौधा लगा रहा है। बाबर ने पूछा, "वृद्ध देव, इस उम्र में आप इतनी मेहनत क्यों कर रहे हैं? इस पेड़ के फल खाने के लिए आप जीवित नहीं रहेंगे।"
वृद्ध ने मुस्कुराकर कहा, "महाराज, मेरे पूर्वजों ने पेड़ लगाए थे, जिनकी छाया और फल आज मैं ले रहा हूँ। उसी तरह, आने वाली पीढ़ियों को छाया और मीठे फल मिलें, इसलिए मैं यह पौधा लगा रहा हूँ।"
वृद्ध की इस नेक सोच से प्रभावित होकर बाबर ने उन्हें सम्मान के रूप में एक सोने का आम भेंट किया। वृद्ध ने उसे लिया और कहा, "महाराज, इस पेड़ को बड़ा होने में सालों लगेंगे, लेकिन आपकी दया से मुझे फल आज ही मिल गया!"
बाबर खुश हुए और एक और सोने का आम देने को तैयार हुए। वृद्ध ने हंसते हुए कहा, "महाराज, यदि आप प्रशंसा करते रहे, तो मुझे और भी बहुत सारे सोने के आम चाहिए होंगे! इसलिए बेहतर होगा कि मैं अब चलता हूँ।"
बाबर हैरान रह गए। तभी उस वृद्ध ने अपना भेष उतारा—वह कोई और नहीं, तेनाली रामन थे! रामन ने अपनी चतुराई से तीन सोने के आम जीत लिए थे। बाबर उनकी बुद्धि से इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने राजा कृष्णदेवराय को पत्र लिखकर रामन की प्रशंसा की। राजा ने रामन का भव्य स्वागत किया।
Moral
बुद्धि और सूझबूझ से किसी भी कठिन परिस्थिति को अवसर में बदला जा सकता है।