एक शांत गाँव में सोमू नाम का एक किसान रहता था। वह अपने बड़े खेतों में बहुत मेहनत से अनाज और सब्जियाँ उगाता था। फसल कटाई का समय करीब था और उसके खेत लहलहा रहे थे।
लेकिन एक समस्या खड़ी हो गई। कबूतरों का एक बड़ा झुंड रोज़ उसके खेतों में आने लगा। वे बीजों और छोटे पौधों को चुगने लगे। सोमू ने उन्हें डराने की बहुत कोशिश की, लेकिन कबूतर नहीं माने। जैसे ही सोमू खेत से जाता, वे फिर से आकर फसल बर्बाद करने लगते।
सोमू को बहुत गुस्सा आया। उसने सोचा, 'ये पक्षी मेरी सारी मेहनत बर्बाद कर रहे हैं!' अगले दिन वह बाज़ार गया और पक्षियों को भगाने के लिए एक बहुत तेज़ ज़हरीली दवा लेकर आया।
उसने वह ज़हर अपने खेतों में छिड़क दिया। अगली सुबह जब सोमू खेत पहुँचा, तो वहाँ का नज़ारा देखकर वह दंग रह गया। बहुत सारे कबूतर ज़मीन पर मृत पड़े थे। लेकिन असली मुसीबत तो अभी आई थी। वह ज़हर मिट्टी के बहुत अंदर तक चला गया था।
कुछ ही समय में सोमू ने देखा कि उसके खेत में अब कुछ भी नहीं उग रहा है। ज़हर की वजह से मिट्टी बंजर हो गई थी। फसल के एक छोटे से हिस्से को बचाने के चक्कर में सोमू ने अपनी पूरी ज़मीन ही बर्बाद कर ली। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
Moral
क्रोध में लिया गया गलत निर्णय भारी नुकसान पहुँचा सकता है।