एक शांत गाँव में अर्जुन, प्रिया और उनका छोटा बेटा रोहन रहते थे। एक दिन जब वे जंगल के रास्ते से गुजर रहे थे, तो उन्होंने झाड़ियों के पास एक नेवले को मृत पाया। उसके पास ही एक छोटा सा नेवले का बच्चा अकेला रो रहा था।
बेचारे बच्चे की हालत देखकर प्रिया का दिल भर आया। उसने उस नन्हे नेवले को घर ले जाने का फैसला किया। अर्जुन को थोड़ा डर था। उसने कहा, 'प्रिया, यह एक शिकारी जानवर है, कहीं यह रोहन के लिए खतरा न बन जाए?' लेकिन उन्होंने उसे पालने का निर्णय लिया। अर्जुन हमेशा रोहन को नेवले से दूर रखता था।
एक शाम जब अर्जुन काम से घर लौटा, तो उसने दरवाजे पर खून के धब्बे देखे। वह डर गया। तभी, मुँह पर खून लगा हुआ वह छोटा नेवला लड़खड़ाते हुए बाहर आया। अर्जुन को लगा कि नेवले ने उसके बेटे पर हमला किया है। गुस्से में आकर उसने एक डंडे से नेवले पर वार कर दिया और वह वहीं मर गया।
तभी अंदर से रोहन के रोने की आवाज़ आई। अर्जुन घबराकर अंदर भागा। उसने देखा कि एक बड़ा ज़हरीला साँप रोहन के पालने के पास खड़ा था। उस छोटे नेवले ने अपनी जान की परवाह किए बिना साँप से लड़ाई की और रोहन को बचा लिया। अर्जुन को समझ आया कि नेवले के मुँह पर लगा खून साँप का था। अपनी जल्दबाजी में उसने एक रक्षक की जान ले ली थी।
Moral
बिना सच्चाई जाने क्रोध में कोई कदम न उठाएं।