नीले समुद्र की गहराइयों में कवि नाम का एक फुर्तीला केकड़ा रहता था। कवि को लहरों के साथ खेलना बहुत पसंद था, लेकिन एक दिन उसके मन में एक अजीब सी जिज्ञासा जागी। 'समुद्र के बाहर की दुनिया कैसी होगी?' उसने सोचा। दुनिया देखने की चाहत में, कवि समुद्र से बाहर निकलकर रेतीले किनारे पर आ गया।
तट पर चलते हुए उसे सब कुछ बहुत अद्भुत लगा। हरी घास और रंग-बिरंगे फूल उसके लिए बिल्कुल नए थे। लेकिन, पास ही एक झाड़ी के पीछे एक भूखी लोमड़ी उसे देख रही थी। 'वाह! कितना स्वादिष्ट भोजन है!' लोमड़ी ने लालच भरी नज़रों से सोचा।
लोमड़ी ने कवि पर हमला किया, लेकिन कवि बहुत तेज़ था। वह इधर-उधर भागने लगा और पत्थरों के बीच से रास्ता बनाकर लोमड़ी को चकमा देने लगा। वह अपनी ताकत से ज़मीन पर प्रहार करता और तेज़ी से भागता, जिससे लोमड़ी परेशान हो गई। कुछ देर तक तो ऐसा लगा जैसे यह कोई खेल हो।
लेकिन जैसे-जैसे सूरज ऊपर चढ़ा, गर्मी बढ़ने लगी। कवि थकने लगा। उसकी गति धीमी हो गई और उसके पैर भारी होने लगे। ज़मीन पर इतनी दौड़ने के कारण उसकी सारी ऊर्जा समाप्त हो गई। अंत में, वह एक बड़े पत्थर के पास निढाल होकर गिर पड़ा। लोमड़ी धीरे से उसके पास आई और मुस्कुराई।
'तुम इतनी देर तक क्यों भाग रहे थे?' लोमड़ी ने मज़ाक उड़ाते हुए पूछा। 'मैंने तुम्हें इसलिए भागने दिया ताकि तुम थक जाओ। कवि, तुम अपनी जगह पर नहीं हो। समुद्र में तुम शक्तिशाली हो, लेकिन यहाँ तुम्हारे पास टिकने के लिए ऊर्जा नहीं है।' कवि को अपनी गलती का एहसास हुआ। अपनी जिज्ञासा के कारण उसने अपना सुरक्षित घर छोड़ दिया था और अब वह मुसीबत में था।
Moral
बिना सोचे-समझे किया गया साहस मुसीबत में डाल सकता है।