एक सुंदर गाँव में एक बड़ा सा तालाब था, जहाँ बहुत सारे रंग-बिरंगे मेंढक खुशी-खुशी रहते थे। एक शाम, रवि और उसके दोस्त खेलने के लिए तालाब के किनारे पहुँचे।
खेलते-खेलते रवि के मन में एक शरारत सूझी। उसने ज़मीन से एक छोटा सा पत्थर उठाया और तालाब में बैठे एक मेंढक की ओर फेंक दिया। पत्थर मेंढक को लगा नहीं, लेकिन आवाज़ सुनकर मेंढक डर गया और पानी में गोता लगा लिया। मेंढक को इस तरह डरते देख रवि को बहुत मज़ा आया।
"देखो, यह कैसे उछल रहा है!" रवि उत्साह से चिल्लाया। उसे देखकर बाकी दोस्तों ने भी पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। हर कोई पत्थर उठाकर मेंढकों की ओर फेंक रहा था। तालाब की शांति शोर से भंग हो गई।
तभी एक बड़ा मेंढक पानी से बाहर आया और बोला, "बच्चों, कृपया हमें परेशान न करें। हम बहुत डर गए हैं," उसने विनती की। लेकिन बच्चों ने उसकी बात अनसुनी कर दी।
कुछ देर बाद, एक दूसरा मेंढक घबराकर आया और बोला, "तुम हमारे पत्थर फेंकने की चिंता करने के बजाय, इस समय आने वाले बड़े सांप के बारे में सोचो! अगर तुम हमें ऐसे ही परेशान करते रहे, तो हम कहाँ छिपेंगे?"
सांप का नाम सुनते ही बच्चों के चेहरे का रंग उड़ गया। उन्हें डर लगने लगा कि कहीं वे भी मुसीबत में न पड़ जाएँ। वे तुरंत पत्थर छोड़कर वहाँ से भाग खड़े हुए। मेंढक फिर से शांति से अपने जीवन में वापस आ गए।
Moral
कमज़ोरों पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करके उन्हें परेशान नहीं करना चाहिए।