एक सुंदर से गाँव में कविन नाम का एक लड़का रहता था। कविन को मीठा खाना बहुत पसंद था। चॉकलेट हो या मिठाई, वह खुद को रोक नहीं पाता था। उसकी माँ अक्सर कहती, 'कविन, ज्यादा मीठा खाने से तुम्हारे दाँत और सेहत खराब हो जाएगी।' लेकिन कविन उनकी बात अनसुनी कर देता था।
कविन की आदत सुधारने के लिए उसकी माँ पास की पहाड़ियों में रहने वाले एक ज्ञानी महात्मा के पास गईं। माँ ने उनसे विनती की, 'महाराज, मेरा बेटा मीठा खाना नहीं छोड़ता। कृपया उसे समझाएं।'
महात्मा ने कविन को देखा और मुस्कुराकर कहा, 'अगले हफ्ते इसे फिर से मेरे पास लेकर आना।'
एक हफ्ते बाद, जब वे वापस आए, तो महात्मा ने कविन को बहुत प्यार से समझाया। उन्होंने बताया कि कैसे ज्यादा चीनी खाने से शरीर में कमजोरी आती है और बीमारियाँ होती हैं। कविन को अपनी गलती का एहसास हुआ।
तभी माँ ने पूछा, 'महाराज, आपने यह बात पहले दिन ही क्यों नहीं बताई? आपने एक हफ्ता इंतज़ार क्यों करवाया?'
महात्मा ने शांति से उत्तर दिया, 'माँ, एक समय था जब मुझे भी मीठा खाने की बहुत बुरी लत थी। जब मैं उस लत में था, तब मुझे दूसरों को समझाने का कोई अधिकार महसूस नहीं होता था। मैंने पहले खुद को उस आदत से मुक्त किया, तभी मैं कविन को सही रास्ता दिखाने के योग्य बना।'
कविन ने उस दिन से मीठा कम कर दिया और स्वस्थ रहने का संकल्प लिया।
Moral
दूसरों को सिखाने से पहले स्वयं को सुधारना आवश्यक है।