एक धुंधली घाटी में रवि नाम का एक चरवाहा रहता था। पिछले कुछ दिनों से एक चालाक लोमड़ी उसकी भेड़ों के मेमनों को चुरा रही थी, जिससे रवि बहुत परेशान था।
एक सुबह, हताशा में रवि ने आसमान की ओर देखकर एक कसम खाई। 'हे ईश्वर! अगर आज वह लोमड़ी पकड़ी गई, तो मैं आपको बलि के रूप में एक भेड़ चढ़ाऊंगा!'
थोड़ी देर बाद, झाड़ियों में कुछ हलचल हुई। रवि को लगा कि लोमड़ी आ गई है। लेकिन जैसे ही उसने झाड़ियों को हटाया, वह डर के मारे कांप उठा। वह कोई लोमड़ी नहीं थी, बल्कि एक विशाल जंगली शेर था, जो एक मेमने को अपने जबड़ों में दबाए तेजी से भाग रहा था!
रवि घबरा गया। उसे अपनी मूर्खतापूर्ण कसम का एहसास हुआ। वह गिड़गिड़ाने लगा, 'हे ईश्वर, मुझे क्षमा करें! मैंने लोमड़ी के लिए एक भेड़ देने की बात कही थी, लेकिन अब तो शेर आ गया है। मैं आपको एक गाय चढ़ा दूंगा! बस कृपया उस शेर को यहाँ से भगा दीजिए!'
उसने अपनी पेशकश बढ़ाने की बहुत कोशिश की, लेकिन स्थिति उसके हाथ से निकल चुकी थी। शेर अपने शिकार के साथ जंगल में गायब हो गया। रवि अपनी जल्दबाजी और गलत वादों के कारण पछताता रह गया।
Moral
जल्दबाजी और लालच में किए गए वादे मुसीबत पैदा करते हैं।