पहाड़ों के पास बसे एक छोटे से गाँव में सोमू नाम के एक बुजुर्ग रहते थे। उन्हें आसमान और तारों को देखने का बहुत शौक था। वे मानते थे कि वे तारों की चाल देखकर भविष्य बता सकते हैं। वे अक्सर गाँव वालों को अपनी ज्योतिष विद्या के बारे में बताते रहते थे।
एक शाम, जब सूरज ढल रहा था, सोमू जंगल के रास्ते पर टहल रहे थे। उनकी नज़रें हमेशा आसमान की ओर ही रहती थीं। अचानक, बादलों के बीच उन्हें एक चमकता हुआ नया तारा दिखाई दिया। ऐसा तारा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था।
"अरे वाह! यह क्या चमत्कार है!" सोमू उत्साह से चिल्लाए। "यह नया तारा संकेत है कि दुनिया में बहुत बड़ा बदलाव आने वाला है! शायद कोई बड़ा तूफान आएगा या धरती हिलेगी!" वे अपनी भविष्यवाणियां जोर-जोर से चिल्लाते हुए आगे बढ़ने लगे।
आसमान को देखते हुए चलने के कारण, उन्होंने रास्ते में आए एक बड़े गड्ढे पर ध्यान ही नहीं दिया। अचानक उनका पैर फिसला और वे सीधे गड्ढे में जा गिरे। "आह! बचाओ!" वे मदद के लिए चिल्लाए।
गाँव वाले दौड़कर आए और उन्हें गड्ढे से बाहर निकाला। कीचड़ में लथपथ सोमू ने आसमान की ओर इशारा करते हुए कहा, "क्या तुमने वह तारा देखा? वह कह रहा है कि दुनिया बदलने वाली है!"
तभी पास खड़े एक छोटे बच्चे ने हंसते हुए कहा, "दादाजी, दुनिया कैसे बदलने वाली है, यह बताने से पहले, क्या आप उस गड्ढे को देख सकते थे जिसमें आप गिर गए? तारों को देखने से पहले अपने कदमों को देखना ज्यादा जरूरी है!"
गाँव के लोग मुस्कुराने लगे और सोमू को अपनी गलती का अहसास हुआ। वे शर्मिंदा होकर चुपचाप खड़े हो गए।
Moral
दुनिया के बारे में बताने से पहले, हमें अपने स्वयं के कार्यों और रास्तों पर ध्यान देना चाहिए।