एक बड़े घर के कोने में एक माँ चूहा और उसका छोटा बच्चा रहते थे। नन्हा चूहा बहुत ही जिज्ञासु था। एक सुबह, जब उसकी माँ सो रही थी, नन्हा चूहा चुपके से बाहर निकल गया और पास के बड़े बगीचे में घूमने लगा।
बगीचा उसे किसी जादुई दुनिया जैसा लगा। घूमते-घूमते उसने एक बहुत ही सुंदर जीव देखा। वह बर्फ जैसा सफेद और मखमल जैसा कोमल था। उसकी आँखें बहुत शांत लग रही थीं। नन्हे चूहे ने सोचा, "यह जीव कितना प्यारा है! मैं इससे दोस्ती करूँगा।" वह धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ने लगा।
तभी अचानक, "कुक्कड़ू-कूँ! कुक्कड़ू-कूँ!" की तेज़ आवाज़ गूँजी। रंग-बिरंगे पंखों वाला एक मुर्गा शोर मचाते हुए वहाँ आया। उस शोर से वह सफेद जीव एकदम चौकन्ना हो गया और नन्हे चूहे को पकड़ने के लिए झपटा! नन्हा चूहा बुरी तरह डर गया और अपनी जान बचाकर भागकर अपने बिल में छिप गया।
शाम को जब चूहा घर लौटा, तो माँ ने घबराकर पूछा, "बेटा, तुम कहाँ थे? क्या हुआ?" चूहा काँपते हुए बोला, "माँ, मैंने एक बहुत सुंदर और शांत दोस्त देखा था, लेकिन एक शोर मचाने वाले राक्षस ने सब खराब कर दिया!"
माँ चूहा ने उसे प्यार से समझाया, "मेरे बच्चे, जिसे तुम सुंदर और शांत समझ रहे थे, वह एक बिल्ली थी। वह दिखने में कोमल है, लेकिन वह शिकार करने वाली है। उस मुर्गे के शोर ने ही तुम्हें बचा लिया। कभी भी किसी के बाहरी रूप को देखकर उसके स्वभाव का अंदाज़ा नहीं लगाना चाहिए।"
Moral
किसी के बाहरी रूप को देखकर उसके चरित्र का निर्णय न करें।