एक घने जंगल में एक माँ भालू अपने नटखट बच्चे के साथ रहती थी। भालू का बच्चा बहुत चंचल था। एक दिन माँ भालू ने उसे समझाया, "बेटा, खेलना अच्छी बात है, लेकिन जब कभी मुसीबत आए, तो घबराना मत। अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करना, क्योंकि बुद्धि ही सबसे बड़ा हथियार है।"
एक दिन जब माँ भोजन की तलाश में दूर गई, तो नन्हा भालू अकेले बोर होने लगा और खेलते-खेलते जंगल के काफी अंदर चला गया। अचानक, उसे एक भयानक दहाड़ सुनाई दी। उसके सामने एक विशाल बाघ खड़ा था। बाघ ने कहा, "आज तो बहुत ही स्वादिष्ट भोजन मिलेगा!"
नन्हा भालू डर गया, लेकिन उसे अपनी माँ की बात याद आई। उसने चारों ओर देखा और उसे एक बड़ी चट्टान दिखी जो एक छोटे पत्थर के सहारे टिकी हुई थी। अगर वह छोटा पत्थर हिलता, तो बड़ी चट्टान बाघ पर गिर सकती थी। लेकिन नन्हा भालू इतना शक्तिशाली नहीं था कि उस पत्थर को हिला सके।
उसने एक तरकीब सोची। उसने बाघ से कहा, "बाघ राजा, मैंने सुना है कि आप जंगल के सबसे ताकतवर जानवर हैं!" बाघ ने गर्व से कहा, "हाँ, मैं बहुत शक्तिशाली हूँ!"
भालू ने आगे कहा, "अगर आप इतने ही ताकतवर हैं, तो क्या आप अपनी शक्ति दिखाकर मुझे खुश कर सकते हैं? बस उस छोटे से पत्थर को अपने पंजे से थोड़ा सा खिसका दीजिए।" बाघ अपनी ताकत दिखाने के लिए उतावला था। उसने जैसे ही उस छोटे पत्थर पर जोर से प्रहार किया, वह पत्थर अपनी जगह से हट गया। इसके साथ ही, वह विशाल चट्टान सीधे बाघ के ऊपर आ गिरी। नन्हा भालू तुरंत वहाँ से भाग निकला। जब माँ भालू वापस आई और उसे सब बताया, तो उसने अपने समझदार बच्चे को गले लगा लिया।
Moral
मुसीबत के समय साहस और बुद्धि से काम लेना चाहिए।